ये निज़ाम-ए-ख़ुदा है, कि वो जब हमसे कुछ लेता है तो उसके बदले हमें किसी ऐसी चीज़ से भर देता है कि हम बिखरने ना पाएं। उसने मुझे इश्क़ से भर दिया और मैंने ख़ुद को इश्क़ के सदके वार दिया है । ये वो एहसास हैं जो सिसकते रहते हैं, दम भरते रहते हैं लेकिन इश्क़वाले किसी से कुछ कह नहीं पाते । मैंने उन्हें कागज़ पर उतार दिया जिसकी सूरत आपके सामने है ।
₹270.00
Ishq Itwar Nahi
ये निज़ाम-ए-ख़ुदा है, कि वो जब हमसे कुछ लेता है तो उसके बदले हमें किसी ऐसी चीज़ से भर देता है कि हम बिखरने ना पाएं। उसने मुझे इश्क़ से भर दिया और मैंने ख़ुद को इश्क़ के सदके वार दिया है । ये वो एहसास हैं जो सिसकते रहते हैं, दम भरते रहते हैं लेकिन इश्क़वाले किसी से कुछ कह नहीं पाते । मैंने उन्हें कागज़ पर उतार दिया जिसकी सूरत आपके सामने है ।
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Sau Striyan Meri Zindagi Mein
औपन्यासिक स्वरूप के कारण संस्मरणों से संपन्न इस किताब में मेरी संगिनियों या अंतरंग स्त्रियों को इतना अधिक नहीं छिपाया गया है कि उन्हें पहचानना मुश्किल हो जाए, क्योंकि मैं भी चाहता हूं कि मुझे और उन्हें बरसों से जानने वाले पाठक हमारे साथ सहज रहें और नए पाठक भी स्त्री पुरुष की अंतरंगताओं या नज़दीकियों से निकले जीवन के बहुत सारे अनोखे आयामों को विस्मय से देखें और जानें। इसीलिए मैंने पूर्व प्रकाशित संस्मरणों में से उन कुछ अनिवार्य संस्मरणों को भी औपन्यासिकता में पिरो दिया है, जो पहले मेरे बहुत कम पाठकों तक पहुँच पाए थे।
Us ek Akele Makan Mein
₹280.00चॉकलेट खाने का सिलसिला
चलता ही रहता था
के बीच में आ टपके थे
२६ जनवरी और १५ अगस्त जैसे दिन
तब तक तो बेहद गरम हो जाना चाहिए था तंदूर
उस एक अकेले मकान में
Jiyo Banaras
बनारस सिर्फ़ एक नगरी मात्र नहीं। बनारस सिर्फ़ एक संस्कृति मात्र भी नहीं। बनारस एक इमोशन है, एक भाव है। क़तई ज़रूरी नहीं की यह भाव धार्मिक ही हो। हाँ इसका झुकाव अक्सर आध्यात्म की ओर होता है। मतलब यह कि जब हम इस सवाल का जवाब ढूँढने निकलते हैं कि बनारस क्या है, हम अपने आप से कई बार यह भी पूछते हुए पाए जाते हैं कि हम कौन हैं ? मानो बनारस का होना और हमारा होना एक तरह से जुड़ा हो। जियो बनारस इसी कनेक्शन को टटोलता है और नतीजा यह कि पाठक अपने आप को हर एक कविता में पाते हैं।
Tedhi Medhi Lakeeren
₹270.00जैसे भारत की आज़ादी को समझने के लिए उसके विभाजन के बारे में जानना ज़रूरी है, उसी प्रकार विभाजन को अगर सही अर्थों में जानना है तो सीमा रेखा की यात्रा बहुत ज़रूरी है, हालाँकि आम आदमी के लिए उस रेखा पर घूमना-फिरना — फिर चाहे पंजाब हो या बंगाल न तो आसान है, न ही हमेशा संभव, फिर भी कवि ह्रदय बिश्वनाथ घोष की इच्छा शक्ति ने इस यात्रा को संभव बनाया। उन्होंने बटंवारे के बाद के दर्द को, अर्थ को, त्रासदी, निरर्थकता और विवशता को, इन कविताओं के ज़रिए जिया है, जो उन्होंने सीमा रेखा पर अपनी यात्राओं के दौरान रची हैं। इसी वजह से यह कविताएं और भी महत्वपूर्ण हो जाती हैं।
Amaltas wala Ishq
बारिश की आमद तक अमलतास गुज़िश्ता वक़्त की यादों सा साथ बना रहता है अमलतासी इश्क़ का मौसम, बेशक एक उम्र के साथ बीत चुका है पर हाँ अमलतास वाला इश्क़ इस किताब की शक्ल में तख़लीक हो चुका है जैसे तपते दिनों में आंखों का सुकून है अमलतास वैसे हज़ारों दिन हर दिन की ख़्वाहिश हर ख्वाहिश के पूरा होने को एक दिन मय्यसर होने का यक़ीन और उस यक़ीन पर यक़ीन होने की आस में गुजरे दिनों की हर याद गर्म मौसम में सुर्ख़ रूह हो जाती हैं और महक जाता है अमलतास वाला इश्क़ ।

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