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डॉ. अनुराग आर्य उत्तर प्रदेश के मेरठ के निवासी हैं। वे पेशे से त्वचा रोग विशेषज्ञ हैं और वर्षों से ब्लॉग लेखन में सक्रिय रहे हैं। दिल की बात नाम का उनका हिंदी ब्लॉग पाठकों के बीच काफ़ी लोकप्रिय है। उनके लेख कई पत्र-पत्रिकाओं और अख़बारों में प्रकाशित हो चुके हैं। लेखन के साथ-साथ उन्हें संगीत, विश्व साहित्य और विश्व सिनेमा में गहरी रुचि है, जिसका असर उनके लेखन में भी दिखाई देता है। आवाज़घर से प्रकाशित उनकी पहली और बहुप्रतीक्षित किताब बुरे लड़कों की हॉस्टल डायरी अमेज़न बेस्टसेलर रही है और पाठकों के बीच विशेष चर्चा में रही है।

Dr. Anurag Arya

डॉ. अनुराग आर्य उत्तर प्रदेश के मेरठ के निवासी हैं। वे पेशे से त्वचा रोग विशेषज्ञ हैं और वर्षों से ब्लॉग लेखन में सक्रिय रहे हैं। दिल की बात नाम का उनका हिंदी ब्लॉग पाठकों के बीच काफ़ी लोकप्रिय है।

उनके लेख कई पत्र-पत्रिकाओं और अख़बारों में प्रकाशित हो चुके हैं। लेखन के साथ-साथ उन्हें संगीत, विश्व साहित्य और विश्व सिनेमा में गहरी रुचि है, जिसका असर उनके लेखन में भी दिखाई देता है।

आवाज़घर से प्रकाशित उनकी पहली और बहुप्रतीक्षित किताब बुरे लड़कों की हॉस्टल डायरी अमेज़न बेस्टसेलर रही है और पाठकों के बीच विशेष चर्चा में रही है।

Author's books

Bure Ladkon ki Hostel Diary

350.00

वो एक हमदर्द शहर था, पर हम सबको टेस्ट ट्यूब पर अलग-अलग टेम्प्रेचर पर रखकर परखा उसने । वो मोहोब्बतों के दिन थे, इसलिए कोई बात उतनी तकलीफ नहीं देती थी ।दिनभर के ग़म अज़ाब दोस्तों में बँट जाते थे। ऐसा नहीं था कि खुदा पर एतबार नही था, पर उस उम्र में ख़ुदा को कम याद किया जाता है । मुख़्तलिफ़ दोस्तों के पास मुख़्तलिफ़ शेड्स थे, जो आहिस्ता आहिस्ता आप में घुलने लगते थे । कुछ हॉस्टली लड़कों ने कहा मैं इन बेतरतीब पन्नो को बाँधकर रख दूं । मैं अलबत्ता इस कशमकश में रहा के अलग-अलग मिज़ाज के इन बेपरवाह लड़कों की डायरी कौन पढ़ेगा । क्योंकि हर सफहा तो अलग क़िस्सा कहेगा । 

फिर भी कुछ बेतरतीब से पन्ने इस उम्मीद में रख रहा हूँ, कि शायद किसी पन्ने में, किसी को अपनी शिनाख़्त मिल जाए ।