Author

निदा रहमान पेशे से पत्रकार और लेखक हैं। उनका जन्म मध्यप्रदेश के छतरपुर शहर में हुआ। उन्होंने महाराजा छत्रसाल महाविद्यालय से बीएससी किया और माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय से मास्टर इन जर्नलिज़्म की डिग्री प्राप्त की। लगभग एक दशक तक उन्होंने राष्ट्रीय न्यूज़ चैनलों में महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारियाँ निभाईं। वे सामाजिक और राजनीतिक विषयों पर निरंतर लेखन और संवाद करती रही हैं तथा स्तंभकार और स्वतंत्र पत्रकार के रूप में सक्रिय हैं। पत्रकारिता में विशिष्ट योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2019 में वूमन्स प्रेस क्लब एमपी द्वारा सम्मानित किया गया। इसके बाद 2021 में उन्हें देश के प्रतिष्ठित लाड़ली मीडिया एडवर्टाइजिंग अवार्ड से भी सम्मान प्राप्त हुआ। साहित्य के क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय है। वर्ष 2021 में उनका संयुक्त कविता संग्रह वर्जनाओं से बाहर प्रकाशित हुआ। 2023 में उन्हें विकास संवाद की संविधान फैलोशिप प्राप्त हुई। वर्ष 2024 में उनका पहला एकल कविता संग्रह इश्क़ इतवार नहीं आवाज़घर पब्लिकेशन से प्रकाशित हुआ।

Nida Rahman

निदा रहमान पेशे से पत्रकार और लेखक हैं। उनका जन्म मध्यप्रदेश के छतरपुर शहर में हुआ। उन्होंने महाराजा छत्रसाल महाविद्यालय से बीएससी किया और माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय से मास्टर इन जर्नलिज़्म की डिग्री प्राप्त की।

लगभग एक दशक तक उन्होंने राष्ट्रीय न्यूज़ चैनलों में महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारियाँ निभाईं। वे सामाजिक और राजनीतिक विषयों पर निरंतर लेखन और संवाद करती रही हैं तथा स्तंभकार और स्वतंत्र पत्रकार के रूप में सक्रिय हैं।

पत्रकारिता में विशिष्ट योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2019 में वूमन्स प्रेस क्लब एमपी द्वारा सम्मानित किया गया। इसके बाद 2021 में उन्हें देश के प्रतिष्ठित लाड़ली मीडिया एडवर्टाइजिंग अवार्ड से भी सम्मान प्राप्त हुआ।

साहित्य के क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय है। वर्ष 2021 में उनका संयुक्त कविता संग्रह वर्जनाओं से बाहर प्रकाशित हुआ। 2023 में उन्हें विकास संवाद की संविधान फैलोशिप प्राप्त हुई। वर्ष 2024 में उनका पहला एकल कविता संग्रह इश्क़ इतवार नहीं आवाज़घर पब्लिकेशन से प्रकाशित हुआ।

Author's books

Ishq Itwar Nahi

270.00

ये निज़ाम-ए-ख़ुदा है, कि वो जब हमसे कुछ लेता है तो उसके बदले हमें किसी ऐसी चीज़ से भर देता है कि हम बिखरने ना पाएं। उसने मुझे इश्क़ से भर दिया और मैंने ख़ुद को इश्क़ के सदके वार दिया है । ये वो एहसास हैं जो सिसकते रहते हैं, दम भरते रहते हैं लेकिन इश्क़वाले किसी से कुछ कह नहीं पाते । मैंने उन्हें कागज़ पर उतार दिया जिसकी सूरत आपके सामने है ।