Author: डॉ. अनुराग आर्य

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लिखना

बरसो से रूठे किसी दोस्त की आवाज को आधी रात में फोन पर सुनना है लिखना किसी पुराने मुफस्सिल से खत को दोबारा पढ़ना है… लिखना शदीद इंतज़ार में बैठे किसी बूढ़े बाप को परदेस में बैठे उसके बेटे के नाम से मुस्तकिल कुछ रकम भेजना है… लिखना रतजगों को इकठ्ठा कर खामोश खड़े दरख्तों […]

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मेरे हिस्से की बारिश

उस रोज भी शदीद बारिश थी ,सुबह के तीन बजे थे , रात कहना शायद ज्यादा मुनासिब होगा। एयरपोर्ट जाने से पहले मै तुम्हारे हॉस्टल आयी थी ,पापा से मैंने हॉस्टल चलने को कहा तो वे कुछ बोले नहीं थे , ना उन्होंने कुछ पूछा था। सीधे गाडी मोड़ दी थी। अचानक यूँ उस वक़्त […]

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हमारे यहाँ भी एक शख्स है “गुलज़ार”

वो बिमल रॉय ,असित सेन ,ऋषिकेश मुखर्जी बासु भट्टाचार्य की स्कूल की पैदाइश था । जिसका अपनी स्टोरी टेलिंग मेथड था । गीत लिखने आया लड़का ,कहानियों से वाकिफ था ।वो कहानियों की नब्ज़ पकड़ता उन्हें टटोलता फिर उनमें खुश्बू डाल देता । कहते है एक ही कहानी को अगर चार लोग कहे सब अपने […]

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वसीयतें

हमारे हॉस्पिटल के बाहर टेंट है ,मै जब भी उन्हें देखता हूँ ठहर जाता हूँ वो एक वर्ल्ड क्लास हॉस्पिटल से मिस मैच कोई अलग टुकड़े नजर आते है। मुश्किल वक़्त में आपके काम करने के तरीके अलग होते है। इससे पहले मैंने टेंट में 2014 में साउथ अफ्रीका में इबोला ऑउटब्रेक में काम किया […]

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